A Chronicle of Enlightened Citizenship Movement in the State Bank of India

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Tuesday, July 18, 2017

"व्यंग्य -
.................
"जीएसटी "

गंगू बकरी चराकर जंगल से लौट रहा था तो पत्रकार ने पूछा - GST मतलब ......?
गंगू बोला - *गुड़ ,शक्कर ,तेल *
आज से सस्ते ......
आगे बढ़े तो एक पार्टी के सज्जन मिले
पत्रकार जी ने पूछा -GST......मतलब ?
वे बोले - जीएसटी वालों ने भेजा है कया ?
बोले - "जरा सोचो तो " (GST)
बाजार बंद हैं पूरे ........
तब तक फुल्की वाला निकला ,
बोला - जीएसटी मतलब कुछ भी हो
आपको कया मतलब   .....!
प्यास लगी तो एक घर में पानी मांगने पहुँचे
तो मालकिन बोली - जीएसटी वाला पानी ,कि ओपन मटके वाला .......
खैर , उनसे पूछा तो बोली - सब्ज़ी में पेकेड  वाला नहीं डालेंगे   ,, नमक ज्यादा डलेगा  !
चलो पानी पीकर आगे बढ़े तो पुलिस वाला खड़ा मिला , पूछा -कयूं भाई , gst जानते हो ......? वो भाई बोला - कुछ भी आ जाए , जेब में किसी बहाने रूपया आना ही है ,उलटा पुलिस वाले ने पूछ लिया - पत्रकार जी , घूंस लेने पर कितना जीएसटी देना पड़ेगा ...?
खैर छोड़ो , ये बताओ कि ये डंफर काहे खड़ा है ........ मांईड यूअर बिजनेस ......
आगे चलो नहीं तो चालान बनाता हूं कयूं कि हेलमेट नहीं लगाए हो ...........कुछ लोग मिले हाथ में कमल के ताजे फूल लिए थे , पत्रकार जी ने उनसे पूछा ये ताजे कमल के फूल कहां से मिल गए ......उनमें से एक रंगदारी से बोला - चुरा के लाए है बोलो कया कर लोगे , ........ सुनिए तो थोड़ा जीएसटी के बारे में बता दीजिये ......?
बोले - तू कौन होता बे GST के बारे में पूछने वाला , ये कमल का कमाल है ,बसूलने का हमारा हक है ,हमारी सरकार है ,सब की ऐसी तैसी कर के रहेगें , पर सुनिए तो नेता जी , सुना है काफी राहत मिलने वाली है आम आदमी को ।  सुनो बे आम आदमी पार्टी का नाम नहीं लेना ,दिल्ली उनसे छुड़ा के रहेंगे  , पर सुनिए तो नेता जी ,कुछ जीएसटी के बारे में भी बताते जाईये .................
दिमाग खराब मत कर बे ,अभी पता करेंगे जीएसटी के बारे में फिर बता पाएंगे समझे ।
आगे बढ़े तो कालेज वाले लड़के  मिल गए ,जब पूछा कि - GST .....मतलब ?
कई लड़के हंसते हुए बोले - संसद हाल में रोते हुए हाथ जोड़े कंपकपाते हुए जो  लाल कृष्ण जैसे आए थे वोई तो हैं जीएसटी .....!
थक गए तो घर पहुंचे , पत्नी पानी लेकर आयी ,तो पूछा - काए  ये जीएसटी का बला है  .....? पत्नी बड़बड़ाती हुई बोली - तुम तो पागलई हो  ...! पैसा वैसा कुछ कमाते नहीं और जीएसटी की बात करने में शर्म नहीं आती ..............
फोन आ गया ,
हां हलो ,हलो ......कौन बोल रहे हैं ?
अरे भाई बताओ न कौन बोल रहे हैं
आवाज आयी - साले तुमको जीएसटी का काम दिया था और घर में पत्नी के साथ ऐश कर रहे हो ...........
नहीं साब , प्यास लगी थी पानी पीने आया था , बहुत लोगों से बात हो गई है ,
 निकलो जल्दी ... बहस लड़ा रहे हो ,बहाना कर रहे हो ..........
काम वाली बाई आ गई ,उससे पूछा तो उसने पत्नी से शिकायत कर दी कि साहब छेड़छाड़ कर रहे हैं .......
घर से निकले तो पान की दुकानवाले गजजू से जीएसटी पर चर्चा छेड़ दी , गजजू गाली देने में तेज था मां बहन से लेकर भोपाली गालियों की बौछार करने लगा ,आजूबाजू वाले बोले   बढ़ लेओ भाई , काहे दिमाग खराब कर रहे हो ...........
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जय प्रकाश पांडेय
9425852221
व्यंग्य -
         "  बरसात "
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बरसात - १,

                  बरसात हो रही है ,काले बादल धमाचौकड़ी मचाये हुए हैं , बरसात में " वो " बेचारी भीग रही है और चुपके चुपके गुन गुना रही है ..........

   "रिमझिम बरसे बादरवा ,
       मस्त हवाएं आयीं ,
           पिया घर आजा आ जा ..."

      और ये साहेब हैं कि भरी बरसात में इज़रायल घूम रहे हैं , गरमा गरम भजिया बनवा रहे हैं ..............!
              भाईयो .....बहनों .......
हमारे यहां बारिश होती है ..... तो लोग भीग जाते हैं ,युवा लोग ज्यादा हैं इसलिए बरसात के गाने खूब गाए जाते हैं , अभी एक तारीख़ को इतनी ज्यादा बारिश हुई कि 500 टाइप के टैक्स बाढ़ में बह गए .......हमारे लोगों ने ताली बजायी .......और वे लोग बरसात में भीगने के डर से घर में घुसे रहे ........! टीवी में देख देख
चिढ़ते रहे ............
     " टिप टिप बरसा पानी ,
          पानी ने आग लगायी ,"
........................
बरसात -२

              बाहर झमाझम बरसात हो रही है और ये सरदार जी रैनकोट पहन के बाथरूम में नहा रहे हैं  !
--- आपको कैसे मालुम ?
--- kya बाथरूम में झांक रहे थे ?
--- और कया कया देखा ?
           जोशी पड़ोसी कुछ भी बोले , हमने नहीं देखा न झांका ,भैया जिनने देखा उनने मीडिया में बता दिया ,सरेआम टीवी में बताया है .............।
          खैर , छोड़ो ....अभी बरसात की बात चल रही है ,
...... तो भैया आजकल बरसाती मेंढक खूब व्यंग्य लिख रहें हैं बरसात में ......।
------ असली kya है कि फिरी में फेसबुक मिल गई है रगड़ो खूब ,
  हररा लगे न फिटकरी ....रंग चोखा ....
-बड़े भाई , जे बताओ कि यदि बरसाती मेंढक व्यंग्य लिख रहे हैं तो आपको कया परेशानी हो रही है ?
........ लिखने दो सालों को और यदि पुराने सांप इन बरसाती मेंढकों का चीरहरण कर पटका पटकी करते हैं तो बीच में नहीं बोलना ।
और यदि बरसात की रात में सफेद बाल वाला सांप मिल जाय तब ....!
तो फिर ये  गाना ........
     " बरसात में हमसे मिले तुम ,
            सनम तुमसे मिले हम ,  "
.....................
बरसात -३

                    बरसात हो रही है और पान के ठेले में बरसात की चर्चा चल रही है ,  एक शराबी गाना गा रहा है .......
       "जिंदगी भर नहीं भूलेगी ,
                 ये बरसात की रात ,"
        सच में इस बार की बरसात की एक जुलाई की रात याद रखने लायक है ,  भरी बरसात में रात के बारह बजे संसद हाल गुलजार हो गया , ठगे- ठगे लुटे लुटे लाल किशन कांपते हाथ जोड़े संसद हाल मे घुस आये हैं ,मुखिया और बड़े मुखिया भी आ गए हैं ,बड़ा जलसा ......बाहर बरसात मची है ,
गंगू बोला - बे लोग दिख नहीं रहे हैं ,कछु बात हो गई का.........?
गंगू को बहलाने के लिए कहा गया कि बरसात की रात है ,सोने का वक्त है.........बाढ़ ही बाढ़ है कैसे आएंगे भला ....?
"तुम सब देख लो ,हम सब एक हैं "
जबरदस्त जलसा ....पंगत बैठी
  बरा मही के साथ जीएसटी परस दिया गया .......
ईशारा हुआ ....सबने ताली बजायी , और बरसात रूक गई ,
  गंगू ने आसमान की तरफ देखा और हाथ जोड़ कर बोला ---
" ऐ बारिश जरा खुलकर बरस
              ये kya तमाशा है ,
इतनी बारिश तो मेरी आंखों से
                       रोज होती है "
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- जय प्रकाश पांडेय
जबलपुर,9425852221

चबूूतरे में चीन

व्यंग्य -
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              " चबूतरे में चीन "
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              गांव के चारों कोनों से  आयी गलियां जहाँ मिलती हैं वहीं पुराना सीताराम का मंदिर है ,मंदिर के सामने के चबूतरे में देश दुनिया की चुहुलबाज़ी होती है ,कुछ नये जमाने के बेरोजगार एवं कुछ पुराने लोगों के बीच बहस किश्तों पर चलती है .....
             ताजी खबर ये है कि गंगू का बेटा चीन सै लौट आया है और साथ में चीनी बहू लेकर आज गांव पहुंच रहा है ,कल ही शहर में शादी करके आज बहू को सीताराम मंदिर में आशीर्वाद दिलवाने आ रहा है ...........
       अरकाटी ने चबूतरे से उठते हुए चटकारा मारा -" देख लिया हमारे गांव की बहादुरी ....चीन के ऊपर चढ़ बैठा  "    गंगू इसलिए खुश दिख रहा था कि बेटा चीन को जीत कर लौटा है ।   गमछे से नाक पोंछते हुए छकौड़ी बोल पड़ा - चीन को ऐसा वैसा मत समझो भारत के लगभग सभी त्यौहार मनवाने का ठेका आजकल चीन के पास है ,चाहे होली की पिचकारी हो चाहे दीवाली की फुलझड़ी हो ,गणेश चतुर्थी के गणेश जी हों और चाहे भाईयों के हाथों में बंधने वाली राखी हो .......और तो और भारत का बचपन चीन के कब्जे में है आधुनिक युग के बच्चे चीनी खिलौने से खेल कर बड़े होते हैं ,हर हाथ में चीनी मोबाइल का कब्जा है हमारी अंगुलियाँ दिन भर चीन में बनी चकाचक screen में नाचतीं हैं ,भारत के घर घर में चीनी घुसपैठ है सीमा के अंदर आकर वो जैसई दंड पेलता है तो हमें हाथ जोड़ने "टंप "के पास जाना पड़ता है ............
        छकौड़ी की बातें सुनकर पुराने टाइप के कांग्रेसी घंससू दादा तैश में आ गए बोले - चल बे  कल का छोकरा चीन के पक्ष की बात करता है चीन को बड़बोला बनाने में हमारे बड़े साहब का योगदान है चायना प्रोडक्ट की घुसपैठ में उनके भाषणों का बड़ा हाथ है जब उनके भाषणों की भी कोई गारंटी नहीं है तो चीनी सामान की कया गारंटी .....वे भाषणों में अच्छे दिन के चलचित्र चायना मेड टीवी में दिखाते रहे , सबके घर के पूजाघर में चायना के बने गणेशजी हंसते हुए उनको आशीर्वाद देते रहे और उनके भाषणों की आवाज चायना के बने माईक से फैलती रही ......।
घंसू दादा के समर्थक दददू भैया खड़े हो गए कहने लगे - तुम्हें मालुम है छकौड़ी ....जब हमारे साहब चश्मा लगाकर चायना के मुखिया से मिले तो चीनी मुखिया ने बताया -हम चश्मे बनाकर भारत भेजते हैं ,चश्मा हम लोग नहीं लगाते ,आंखें अंदर करके ऐसे रहते हैं कि देखने वाला हम पर शक ही करता रहता है कि हम सो रहे हैं कि जाग रहें हैं ,वे भले सोचें कि जितनी हमारी आंखें खुलतीं हैं उतनी वे सोते समय खोलकर सोते हैं ,  चीनी लोग आंखें अंदर करके सामने वाले को झटके मारते हैं हिंदी चीनी भाई भाई कहके उनके घर में घुस जाते हैं , चीन जानता है कि आत्ममुग्धता  अपनी कमियों पर परदा डाले रखता है इसलिए कमियों में घात लगाके  "इतता इतता पानी घोर घोर रानी "कहते हुए हम लोग घरों में घुसपैठ कर जाते हैं ......
            दददू भैया की बा़तें सुनकर जुुममन मियां खुचड़ करने में उतारू हो गए मजाक के लहजे में भाषण देने पे उतारू हो गए ,कहने लगे -चीन में मुसलमानों पर होते जुल्म की खबर से जे चौकन्ने हो गए और तुरंत चीन चल दिए ,चीन में मुसलमानों को दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध है पर जे साहब सफेद दाढ़ी सेट कराके वहां के मुसलमानों को चिढ़ाने पहुंच गए चीन , इनकी सफेद दाढ़ी देखकर चीन के मुखिया ने चीन के मुस्लिमों  को सड़क पर नचवा दिया ,और चीन ने हिंदी चीनी भाई भाई के नारे लगाते हुए चीन की मस्जिदों में भारत में बने कपड़े से चीनी झंडा टांग दिया था , "चीन चिढ़़ाने में बहुत माहिर है " भारत और भूटान के बीच में खड़े होकर कपालभारती करने लगता है और भारत में 9000 करोड़ का मेट्रो चलाने का ठेका ठग लेता है , चीन से लौटते हुए एक पत्रकार ने इनसे पूछ लिया -तिरछी नजर से देखने वाला आपका (ऐनक)चश्मा  मेड इन चायना है कया ? तो साहब से जबाव मिला - बेबजह मुसकराओ ,जब मन करे गुनगुनाओ ,खिलखिलाओ ,चायना को चलने दो अपनी चाल से , तुम खुद के नारे लगवाओ ,जहाँ भी जाओ ...........
         चबूतरे में बहस चल ही रही थी कि उधर से सजी धजी कार मंदिर के सामने रूकी ,सब हकके बकके चुप हो गए ऐसा लगा जैसे चीन ने हमला कर दिया हो ,दूल्हा ने चीनी बहू को हाथ पकड़ कर जैसई कार से उतारा .....चबूतरे में भारत माता की जय के जय जयकारे होने लगे ........
         एक नयी उमर के लड़के ने मजाक में गंगू से" चाऊ इन लाई"  बोलने को कहा तो गंगू शरमाते हुए बोल पड़ा "चने की लाई "
पीछे से किसी की आवाज आई-भारत करेगा चीन पे चढ़ाई ......
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जय प्रकाश पांडेय

Wednesday, June 28, 2017

East Meets West: Retreat in Rishikesh (India)

October 1 - 7, 2017



Yoga means to join or unite with a higher power or spiritual force. 

Join us at Rishikesh for a Comprehensive Retreat on Yoga, Meditation, Laughter Yoga, Spirituality & The Science of Happiness. Be there! 

To get in touch, you can call us on: 7389938255 or write to us at lifeskills.happiness@gmail.com.

Sharing  a couple of links below giving more details about the programme:



Jagat Singh Bisht
Founder: LifeSkills

Saturday, December 17, 2016

Buddha: The Ultimate Happiness Guru

i teach happiness..: Buddha: The Ultimate Happiness Guru: The  Greatest Blessings Generally, it is believed that the Buddha was a pessimist who preached misery. Nothing can be farther from...